अफ़ग़ान महिलाओं की बता वायरल हो रही यह तस्वीर ईरान की है

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े के बाद महिला अधिकारों की चिन्ताएं बढ़ गयीं हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर स्कर्ट पहनी और अख़बार पढ़ती कुछ महिलाओं की तस्वीर शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि ये 1970 के समय की अफ़ग़ान महिलाओं की तस्वीर है. ये दावा भ्रामक है: मीडिया रिपोर्ट्स में ये तस्वीर इरान की बताई गयी थीं.

15 अगस्त को ट्वीट में शेयर की गयी तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा, "अफ़ग़ानिस्तान 1970." तस्वीर को अंग्रेज़ी कैप्शन के साथ भी ट्विटर पर शेयर किया गया. इसे 200 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है.

इस तस्वीर में कुछ महिलाएं बेंच पर बैठी हैं. कुछ ने स्कर्ट पहनी हैं, लेकिन किसी ने भी हिजाब नहीं पहना हुआ है.

कुछ अन्य फ़ेसबुक यूज़र्स ने इसे यहां और यहां शेयर किया.

2001 में अमेरिका के नेतृत्व में हस्तक्षेप की मदद से तालिबान को सत्ता से हटाए जाने के बाद इसका एक बार फिर सत्ता में आना कई तरह की चिंताओं का कारण बना हुआ है. पहले भी तालिबान का मानवाधिकार मामलों में बेहद चिंताजनक रिकॉर्ड रहा है.

तालिबान ने 1996 से 2001 के बीच अपने प्रशासन के दौरान महिलाओं और लड़कियों पर अत्यंत कठोर नियम लागू किये. ये नियम पत्थर मारने से हुई कई मौतों, लड़कियों को स्कूल भेजे जाने पर रोक और महिलाओं के पुरुषों के संपर्क से बच कर काम करवाने की वजह बनें.

तालिबानी प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस बार पहले से "अलग और बेहतर प्रशासन" होने की बात करते हुए प्रेस कॉन्फ़रेंस में कहा कि वो "इस्लाम के नियमों के तहत महिलाओं को काम करने की छूट देंगे", लेकिन इसके बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.

यही तस्वीर कई और देशों में इसी दावे के साथ शेयर की गयी जिनमें थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, स्पेन और हंगरी शामिल हैं.

लेकिन ये सभी पोस्ट भ्रामक हैं.

इस तस्वीर का गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर ये फ़ॉरेन पॉलिसी की वेबसाइट पर यहां मिली. इसे 6 फ़रवरी, 2012 को शेयर किया गया था और तस्वीर के टाइटल में लिखा है, "तेहरान के बीते दिनों की."

इसका कैप्शन कहता है, "1971 में तेहरान विश्वविद्यालय का स्टूडेंट्स लाउन्ज. तेहरान विश्वविद्यालय 1934 में स्थापना के समय महिलाओं के लिए खुला था. क्रांति के बाद भी महिलाओं को विश्वविद्यालय जाने की अनुमति तो मिली लेकिन अब वो अलग हिस्से में बैठती हैं."

1978 से 1979 के बीच हुई ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद देश सबसे बड़ा इस्लामिक रिपब्लिक बनकर उभरा था.

नीचे भ्रामक पोस्ट (बाएं) और फ़ॉरेन पॉलिसी की तस्वीर (दाएं) के बीच तुलना दिखाई गयी है:

भ्रामक पोस्ट (बाएं) और फ़ॉरेन पॉलिसी की तस्वीर (दाएं) के बीच तुलना

फ़ॉरेन पॉलिसी ने तस्वीर का क्रेडिट "कावेह फ़ार्रूख़" को दिया है. फ़ार्रूख़ प्राचीन ईरान पर लिखने वाले के अवॉर्ड विजेता इतिहासकार हैं.

यही तस्वीर फ़ार्रूख़ की वेबसाइट पर इस लेख में प्रकाशित की गयी है जिसका टाइटल है, "1960 और 1970 में पुराना तेहरान."

इसके साथ कैप्शन है, "1971 में तेहरान विश्वविद्यालय (स्रोत: आर तारवर्दी (संपादक) और ए मसौदी (कला संपादक), द लैंड ऑफ़ किंग्स, तेहरान: रहमान पब्लिकेशन्स, 1971)."

ये तस्वीर टर्किश की इरान में इस्लामिक क्रांति पर छपी इस रिपोर्ट में भी शेयर की जा चुकी है.

AFP ने अफ़ग़ानिस्तान के बारे में फैल रही ग़लत सूचनओं पर पहले भी कई रिपोर्ट लिखी हैं जिन्हें आप यहां, यहां और यहां पढ़ सकते हैं.

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