हिमस्खलन के दावे से वायरल ये वीडियो AI जेनरेटेड है
- प्रकाशित 17 फरवरी 2026, 14h26
- 3 मिनट
- द्वारा Sachin BAGHEL, एफप भारत
जनवरी 27 को उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों के लिए हिमस्खलन की चेतावनी जारी की गई थी. हालांकि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा एक वीडियो, जिसमें पहाड़ से बर्फ़ तेजी से नीचे आती दिख रही है, एआई से बनाया गया है. यह क्लिप सबसे पहले एक ऐसे अकाउंट से शेयर की गई जिसमें बताया गया था कि इसे टेक्स्ट-टू-वीडियो एआई मॉडल Sora से बनाया गया है. वीडियो में कई विसंगतियां भी दिखती हैं, जो यह संकेत देती हैं कि यह असली नहीं बल्कि सिंथेटिक कंटेंट है.
6 फ़रवरी 2026 को इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो का कैप्शन और उस पर लिखा टेक्स्ट है, "उत्तराखंड में हिमस्खलन".
वीडियो में ऐसा दिखता है जैसे पहाड़ से बर्फ़ का बड़ा हिस्सा तेजी से नीचे आ रहा है और एक संकरी सड़क पर खड़े लोगों और वाहनों को तबाह करते हुए आगे बढ़ता जा रहा है.
जनवरी में उत्तराखंड में भारी बर्फ़बारी से पूरा इलाका ढक गया था जिसके चलते वहां हिमस्खलन की चेतावनी जारी की गई थी (आर्काइव्ड लिंक).
इसके बाद यह वीडियो फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर उत्तराखंड के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के दावे से भी शेयर किया गया.
27 जनवरी की शाम जम्मू-कश्मीर के एक पर्यटन स्थल सोनमर्ग में हिमस्खलन हुआ था. प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया समाचार एजेंसी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में बर्फ़ को तेज़ी से गिरते और पूरे क्षेत्र को ढकते हुए देखा जा सकता है (आर्काइव्ड लिंक). अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई.
हालांकि भारत के हिमालयी क्षेत्र हिमस्खलन और अनियमित सर्दियों की बारिश के लिए संवेदनशील हैं, लेकिन वायरल हो रहा वीडियो उत्तराखंड में हुए किसी हिमस्खलन का नहीं है (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो के कुछ हिस्सों को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि यही क्लिप 30 जनवरी को इंस्टाग्राम पर शेयर की गई थी. इसे एक ऐसे अकाउंट ने पोस्ट किया था, जो नियमित रूप से एआई से बनाए गए वीडियो शेयर करता है (आर्काइव्ड लिंक).
30 जनवरी की उस पोस्ट के कैप्शन में टेक्स्ट-टू-वीडियो एआई मॉडल "सोरा" का भी उल्लेख है.
गलत दावे के साथ शेयर किए गए इस वीडियो की बारीकी से जांच करने पर इसमें कई दृश्य विसंगतियां दिखाई देती हैं, जैसे दुकानों के बोर्ड पर समझ में न आने वाला टेक्स्ट और भारी हिमस्खलन देखते हुए भी सड़क पर मौजूद लोगों में कोई प्रतिक्रिया का ना होना.
हाइव मॉडरेशन के एआई वीडियो डिटेक्शन टूल से किए गए विश्लेषण में पाया गया कि यह वीडियो "संभवतः एआई द्वारा बनाया गया" हो सकता है (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी पहले भी प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े ऐसे कई झूठे दावों का फ़ैक्ट चेक कर चुका है, जिनमें एआई से बनाए गए वीडियो का इस्तेमाल किया गया था.
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