सूरत में "बाढ़ के ड्रोन फ़ुटेज" के दावे से वायरल वीडियो दरअसल एआई जेनरेटेड है
- प्रकाशित 21 जुलाई 2026, 13h29
- 2 मिनट
- द्वारा Vishesh SINGH, AFP भारत
जुलाई 2026 में मॉनसून की बारिश ने जब सूरत शहर को जलमग्न कर दिया, तब बाढ़ग्रस्त शहर के कथित ड्रोन फ़ुटेज के दावे से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. हालांकि क्लिप में मौजूद संकेतों से पता चलता है कि यह वीडियो फ़र्ज़ी है, और डिटेक्शन टूल्स ने भी इसे AI-जेनरेटेड बताया है.
इंस्टाग्राम पर 10 जुलाई 2026 को शेयर किये गये वीडियो के ऊपर लिखा टेक्स्ट है, "ड्रोन कैमरे में कैद सूरत का जलप्रलय!, 3-4 फीट पानी में डूबा शहर, सैकड़ों गाड़ियां हुईं बंद."
वीडियो में आंशिक रूप से जलमग्न एक शहर के कई हवाई दृश्य दिखाए गए हैं, जिनमें ऊंची इमारतों के ब्लॉक बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं.
कैप्शन में दावा किया गया है कि इसे सूरत में "8 जुलाई, 2026 की सुबह" फ़िल्माया गया था.
क्लिप को समान दावों के साथ इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक पर भी शेयर किया गया.
जुलाई 2026 में भारी बारिश के कारण गुजरात के कुछ हिस्से जलमग्न हो गए. सूरत में जुलाई में दो दिनों के भीतर 358 मिलीमीटर (14 इंच) बारिश दर्ज की गई; अधिकारियों ने बताया कि 11 जुलाई तक 34 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 3,800 लोगों को शहर से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका था (आर्काइव्ड लिंक).
स्थानीय मीडिया ने शहर में शूट किया गया एक वीडियो पब्लिश किया, जिसमें सड़कों पर जलभराव और पानी में डूबी गाड़ियां दिखाई दे रही हैं (आर्काइव्ड लिंक).
मॉनसून की सालाना बरसात ने भारत के कई अन्य शहरों, जैसे मुंबई और दिल्ली में भी जुलाई में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी थी (आर्काइव्ड लिंक).
हालांकि यह क्लिप AI से बनाया गया है और इसमें सूरत के हालात नहीं दिखाए गए हैं.
वायरल वीडियो की बारीकी से जांच करने पर उसमें कुछ विज़ुअल गड़बड़ियाँ दिखाई देती हैं, जैसे कि वीडियो के आठवें सेकंड पर एक ट्रैफ़िक पोल का अचानक गायब हो जाना.
Google के वीडियो वेरिफ़िकेशन टूल पर चेक करने पर AFP ने पाया कि इस तस्वीर में SynthID मौजूद है -- यह गूगल का एक अदृश्य वॉटरमार्क होता है, जिसे कंपनी अपने प्लेटफ़ॉर्म से बनाए गए एआई कंटेंट को चिन्हित करने और पहचानने के लिए जोड़ रही है (आर्काइव्ड लिंक).
AI डिटेक्शन टूल 'Hive Moderation' का इस्तेमाल करके AFP ने वीडियो का अलग से विश्लेषण किया गया, जिससे पुष्टि हुई कि इसके AI-जेनरेटेड होने की संभावना "99.9 प्रतिशत" है (आर्काइव्ड लिंक).
AFP ने पहले भी AI-जेनरेटेड कंटेंट पर आधारित कई भ्रामक दावों को फ़ैक्ट चेक किया है.
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