टाइम मैग्जीन के कवर इमेज के दावे से शेयर की गई ये तस्वीर एआई जेनरेटेड है
- प्रकाशित 23 जुलाई 2026, 14h17
- 4 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, AFP भारत
देश की परीक्षा प्रणाली में खामियों के खिलाफ़ जंतर मंतर पर 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल पहुंचा दिया, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट्स में किया गया यह दावा गलत है कि अमेरिकी समाचार पत्रिका TIME ने वांगचुक को अपने कवर पेज पर स्थान दिया है. ऐसा कोई अंक मौजूद नहीं है, और वायरल तस्वीर बनाने वाले व्यक्ति ने AFP से पुष्टि की कि उन्होंने वांगचुक के समर्थन में यह आर्टवर्क तैयार करने के लिए AI का उपयोग किया था.
जुलाई 15, 2026 को फ़ेसबुक पर शेयर किये गए पोस्ट में कथित मैग्जीन कवर की एक तस्वीर शेयर की गई, जिसके कैप्शन का एक हिस्सा है, "विश्वविख्यात TIME मैगजीन पत्रिका ने अपने कवर पेज पर यह तस्वीर लगाकर सोनम वांगचुक को अपना समर्थन दिया है. अगर, मोदी सत्ता ने सोनम से बातचीत नहीं की, तो यह अंतरराष्ट्रीय मसला गले की फांस भी बन सकता है."
जुलाई 2026 दिनांकित इस कथित अंक में वांगचुक को एक रेतघड़ी के भीतर दिखाया गया है, जिसमें रेत नीचे खिसक रही है. पत्रिका के नाम TIME (समय) के नीचे लिखा है: "is running out" (समाप्त हो रहा है).
पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ़ कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हज़ारों छात्र दिल्ली में जमा हुए जिसके बाद से ही इस तस्वीर को शेयर करने वाली अन्य समान दावे की पोस्ट्स पर लोगों ने प्रतिक्रिया दी (आर्काइव्ड लिंक).
इस आंदोलन की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा है, जिन्हें प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था की बार-बार हुई विफ़लताओं, विशेषकर भारत की मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के संचालन में गड़बड़ियों, का ज़िम्मेदार मानते हैं.
यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ जिसमें वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कई सदस्यों ने CJP कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल की (आर्काइव्ड लिंक).
दिल्ली प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच 18 जुलाई को संघर्ष हुआ और वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाया गया. वांगचुक की पत्नी ने आरोप लगाया कि चिकित्सा देखभाल के नाम पर सरकार उन्हें "गैरकानूनी रूप से हिरासत में" रख रही है (आर्काइव्ड लिंक).
यह लगभग पांच वर्षों में दिल्ली का सबसे बड़ा प्रदर्शन था. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर मार्च करने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जिसमें कम से कम 178 लोग घायल हुए (आर्काइव्ड लिंक).
प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय कवरेज मिलने की सराहना करने वाले कमेंट्स से संकेत मिलता है कि कई लोगों ने कथित TIME कवर को वास्तविक समझ लिया, जबकि ऐसा नहीं है.
21 जुलाई को TIME पत्रिका के एक प्रवक्ता ने AFP से कहा, "यह तस्वीर किसी भी तरह से TIME का वास्तविक कवर नहीं है."
पिछले कुछ महीनों में प्रकाशित TIME के कवरों के आर्काइव , जिनमें जुलाई 2026 का अंक भी शामिल है, में कहीं भी वांगचुक को शामिल नहीं किया गया है (आर्काइव्ड लिंक यहां, यहां).
ऑनलाइन शेयर किए गए कथित कवर पर मौजूद तारीख भी इसके फ़र्ज़ी होने का संकेत देती है. TIME पत्रिका सामान्यतः तारीख को ऊपर बाईं ओर प्रकाशित करती है, जबकि इस वायरल तस्वीर में तारीख ऊपर दाईं ओर दिखाई गई है.
आगे गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही तस्वीर 14 जुलाई को इंस्टाग्राम पर अपलोड की गई मिली (आर्काइव्ड लिंक).
पोस्ट के कैप्शन में एक डिस्क्लेमर दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि यह "एक स्वतंत्र वैचारिक कलाकृति है, जिसे शांतिपूर्ण विरोध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है".
इंस्टाग्राम अकाउंट के ओनर सुजन कुंदारी ने AFP को बताया कि उन्होंने यह तस्वीर वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में बनाई थी.
कुंदारी ने 16 जुलाई को AFP से कहा, "इस कलाकृति का TIME पत्रिका अथवा उसकी किसी एजेंसी या कार्यालय से किसी भी प्रकार का संबंध या जुड़ाव नहीं है."
उन्होंने यह भी बताया कि यह "कलाकृति" कई डिज़ाइन और जेनरेटिव AI टूल्स के संयोजन से बनाई गई थी.
गूगल के SynthID डिटेक्शन टूल से की गई तस्वीर की जांच में "बहुत हद तक" इसके AI टूल्स का उपयोग करके बनाये जाने के संकेत मिलते हैं (आर्काइव्ड लिंक).
AFP ने CJP के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य गलत जानकारियों को भी यहां, यहां और यहां फ़ैक्ट-चेक किया है.
कॉपीराइट © एएफ़पी 2017-2026. इस कंटेंट के किसी भी तरह के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन की ज़रूरत पड़ेगी. अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.