इटली की प्रधानमंत्री का शरिया पर दिया गया ये बयान दरअसल AI जेनरेटेड है
- प्रकाशित 23 जुलाई 2026, 07h40
- 3 मिनट
- द्वारा Sachin BAGHEL, AFP भारत
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि इटैलियन प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अंग्रेज़ी में कह रही हैं कि इटली में शरिया कानून लागू नहीं होने देंगी. यह वीडियो AI से बनाया गया है. जांच में पता चला कि यह वीडियो जर्मनी के चांसलर फ़्रेडरिक मर्ज़ के साथ हुई एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस की तस्वीर का इस्तेमाल कर तैयार किया गया है. उस कॉन्फ़्रेंस का पूरा वीडियो देखने पर स्पष्ट होता है कि वायरल वीडियो AI से बनाया गया है. गौरतलब बात ये है कि कार्यक्रम में मेलोनी ने अंग्रेज़ी नहीं, इटैलियन भाषा में बात की थी.
जुलाई 9, 2026 को X पर शेयर की गई एक पोस्ट का कैप्शन है, "हम इटली में शरिया कानून लागू नहीं होने देंगे. मैं जॉर्जिया मेलोनी हूं. मैं ईसाई हूं. मैं इटली की बेटी हूं - जार्जिया मेलोनी."
करीब 10 सेकंड के इस वीडियो में मेलोनी को जर्मनी और इटली के झंडों वाले मंच पर खड़े होकर अंग्रेज़ी में कैप्शन दोहराते हुए देखा जा सकता है.
यह वीडियो 1,600 से अधिक बार शेयर हुआ है तथा इस अकाउंट ने पहले भी कई गलत दावे शेयर किये हैं, जिन्हें AFP ने फ़ैक्ट-चेक किया है.
यही वीडियो फ़ेसबुक और X पर भी इसी तरह के दावों के साथ शेयर किया गया है.
पोस्ट पर एक यूज़र ने लिखा, "क्या हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ऐसा बोल सकते हैं?"
दूसरे यूज़र ने लिखा, "बिल्कुल सही. जो देश इस्लामिक नहीं है, वहां शरिया कानून का क्या काम और उसे लागू क्यों किया जाए?"
हालांकि, मेलोनी ने बहुत पहले इस्लामी संस्कृति और यूरोपीय मूल्यों के बीच "अनुकूलता की समस्या" को लेकर बयान दिया था, लेकिन यह वायरल वीडियो असली नहीं है, इसे AI से बनाया गया है (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).
वायरल क्लिप के पहले फ़्रेम को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर AFP को 23 जनवरी की एक मीडिया रिपोर्ट मिली, जिसमें मेलोनी की यही तस्वीर इस्तेमाल की गई थी (आर्काइव्ड लिंक).
यह तस्वीर यूरोपियन प्रेसफ़ोटो एजेंसी (EPA) की है, जिसका कैप्शन है: "23 जनवरी 2026 को रोम स्थित विला डोरिया पाम्फिली में इटली-जर्मनी के बीच शिखर सम्मेलन के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी मौजूद हैं."
यह तस्वीर EPA की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है (आर्काइव्ड लिंक).
इसके बाद कीवर्ड सर्च करने पर AFP को 23 जनवरी को इटली सरकार के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड की गई इसी संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस की पूरी रिकॉर्डिंग मिली (आर्काइव्ड लिंक).
EPA की तस्वीर यूट्यूब वीडियो के 20 मिनट 15 सेकंड वाले हिस्से से मेल खाती है.
वीडियो को देखने पर पता चला कि मेलोनी ने पूरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान केवल इटैलियन भाषा में बोला था, जबकि वायरल वीडियो में उन्हें अंग्रेज़ी बोलते दिखाया गया है.
इसके अलावा, वायरल क्लिप में उनके कानों की बालियां असली वीडियो से अलग हैं और पोडियम पर दिखाई देने वाली काली तार भी मूल वीडियो में मौजूद नहीं है.
वायरल क्लिप के नीचे, दाईं ओर Grok AI चैटबॉट का वॉटरमार्क दिखाई देता है, जो पुष्टि करता है कि यह AI जेनरेटेड है.
AFP द्वारा वेरिफ़िकेशन प्लगइन में उपलब्ध 'HIYA वॉइस क्लोनिंग डिटेक्शन टूल' से वायरल वीडियो के ऑडियो की जांच करने पर रिजल्ट "बहुत अधिक संभावना है कि AI से बनाई गई है" आया (आर्काइव्ड लिंक).
AFP पहले भी मेलोनी से जुड़े AI-जेनेरेटेड वीडियो और तस्वीरों पर आधारित कई गलत दावों का फ़ैक्ट चेक कर चुका है (आर्काइव्ड लिंक).
जॉर्जिया मेलोनी खुद भी AI से बनाई गई अपनी नकली तस्वीरों की आलोचना कर चुकी हैं. उन्होंने ऐसे डीपफ़ेक को "एक खतरनाक हथियार" बताया है, जो किसी भी व्यक्ति को निशाना बनाकर नुकसान पहुंचा सकता है.
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