बांग्लादेश की इस्लामिक पार्टी का जंतर मंतर प्रोटेस्ट के समर्थन वाला 'प्रेस नोट' एआई जेनरेटेड है
- प्रकाशित 24 जुलाई 2026, 13h23
- 3 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, AFP भारत
भारत में नीट सहित अन्य पेपर लीक के खिलाफ़ ऑनलाइन शुरू हुए "कॉकरोच" आंदोलन के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन नरेंद्र मोदी की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरे हैं. इसी बीच सोशल मीडिया यूज़र्स ने प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने के लिए यह गलत दावा करते हुए कि इस आंदोलन को बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी का समर्थन प्राप्त है, एक कथित प्रेस नोट को आंदोलन के "मकसद" का सबूत बताकर शेयर किया. लेकिन जमात बांग्लादेश के एक प्रवक्ता ने AFP को बताया कि यह नोट फ़र्ज़ी है. इसमें कई त्रुटियां हैं और वेरिफ़िकेशन टूल्स ने भी स्पष्ट किया है कि इसे AI की मदद से बनाया गया है.
इमेज को X पर 22 जुलाई को शेयर किया गया है, जिसका कैप्शन है, "बधाई हो कॉकरोचों. तुम्हें एशिया के सबसे बड़े आतंकी और जिहादी संगठन "जमात -ए - इस्लामी" बांग्लादेश का बिना शर्त समर्थन मिल गया है."
पोस्ट के साथ शेयर की गयी कथित प्रेस विज्ञप्ति को बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी द्वारा जारी किया गया बताया जा रहा है. इसमें भारत में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन का समर्थन और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ़ "किसी भी दमन, हिंसा या अन्याय" की कड़ी निंदा की गई है.
जुलाई में हज़ारों प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली में एकत्र हुए (आर्काइव्ड लिंक).
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ऑनलाइन आंदोलन की मांगें देशभर में आयोजित रैलियों में भी गूंजने लगीं. आंदोलन ने अपने दायरे का विस्तार करते हुए बेरोज़गारी, युवाओं के लिए अवसरों की कमी और मोदी सरकार की कथित रूप से तानाशाही कार्यशैली जैसे मुद्दों को भी शामिल कर लिया.
पुलिस ने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर मार्च करने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया. यह दिल्ली में लगभग पांच वर्षों के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक था (आर्काइव्ड लिंक).
पुलिस के अनुसार, 60 नागरिक और 119 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि प्रदर्शन आयोजकों का कहना है कि सैकड़ों प्रदर्शनकारी चोटिल हुए हैं.
यह कथित प्रेस विज्ञप्ति इंस्टाग्राम और X पर भी समान दावों के साथ शेयर की गई, और न्यूज़ चैनल NewsX live ने भी इसे प्रसारित किया था.
एक पोस्ट पर कमेंट में लिखा गया, "इस आंदोलन के असली मास्टरमाइंड देश के बाहर की शक्तियां हैं जो भारत में अशांति फैलाना चाहती हैं."
एक अन्य कमेंट में कहा गया, "विदेशी इस्लामी जिहादी ही इस आंदोलन के असली फंडर हैं; यह प्रेस नोट उसका प्रमाण है."
लेकिन यह बयान फ़र्ज़ी है
जमात-ए-इस्लामी के केंद्रीय मीडिया और प्रचार मामलों के सचिव एहसानुल महबूब जुबैर ने AFP को बताया कि यह कथित बयान "फ़र्ज़ी, मनगढंत है और इसका स्रोत बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी नहीं है."
उन्होंने 21 जुलाई को कहा, "गलत दावे की पोस्ट में शेयर किए गए लेटरहेड/पैड में कई गलतियां हैं. वायरल पोस्ट में दिखाया गया लोगो जमात इस्तेमाल नहीं करती. उसमें दिया गया कार्यालय का पता और अन्य विवरण भी जमात द्वारा उपयोग किए जाने वाले विवरण से मेल नहीं खाते हैं."
पार्टी ने 21 जुलाई को अपने आधिकारिक X अकाउंट पर भी एक पोस्ट जारी कर इस फ़र्ज़ी बयान के प्रसार की निंदा की (आर्काइव्ड लिंक).
नोट में अन्य गलतियों में लेटरहेड के लोगो में "Bangladesh" शब्द की गलत वर्तनी और शुरुआती पैराग्राफ़ में "courageous" शब्द की गलत स्पेलिंग शामिल है.
वायरल प्रेस नोट की तुलना जब बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी की एक वास्तविक प्रेस विज्ञप्ति से की गई, तो उसकी भाषा, प्रारूप और संरचना में कई गलतियां सामने आईं.
Hive Moderation डिटेक्शन टूल के विश्लेषण के अनुसार, इस प्रेस नोट में AI-जेनरेटेड कंटेंट होने की "अत्यधिक" संभावना है (आर्काइव्ड लिंक).
AFP इससे पहले भी CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों से जुड़े अन्य गलत दावों का फ़ैक्ट-चेक कर चुका है.
कॉपीराइट © एएफ़पी 2017-2026. इस कंटेंट के किसी भी तरह के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन की ज़रूरत पड़ेगी. अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.