पाकिस्तान में मुहर्रम के जुलूस का वीडियो ईरान का बताकर शेयर किया गया

सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे एक वीडियो -- जिसमें लोगों को अमेरिका, इज़रायल और भारतीय झंडे को आग लगाते देखा जा सकता है -- के साथ दावा किया जा रहा है कि ये ईरान में भारत के अमेरिका और इज़रायल से संबंधों के विरोध में किया गया प्रदर्शन है. हालांकि यह दावा गलत है और वीडियो वास्तव में पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में एक छात्र संगठन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किया गया था.

जून 27, 2026 को X पर शेयर की गई एक पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, "ईरानी भारतीय झंडा इज़राइली और अमेरिकी झंडे के साथ क्यों जला रहे हैं?" 

कैप्शन में आगे लिखा है, "यह सच है कि जयशंकर ने भारत की विदेश नीति बर्बाद कर दी है और यह उनकी विफ़लता का नतीजा है. बीजेपी की वजह से पूरी दुनिया हमसे नफ़रत कर रही है." 

वीडियो में काले कपड़े पहने लोगों की भीड़ ज़मीन पर बिछे भारतीय, अमेरिकी और इज़रायली झंडों के आसपास खड़ी दिखाई देती है. कुछ लोग ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीरें भी पकड़े हुए हैं, जिनकी मिडिल ईस्ट युद्ध के पहले दिन अमेरिकी-इज़रायली हमलों में मौत हो गई थी. 

इसके बाद एक व्यक्ति झंडों पर ज्वलनशील तरल छिड़क कर उन्हें आग लगा देता है. 

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर AFP द्वारा X साइन जोड़ा गया है

यही वीडियो फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसी तरह के दावों के साथ शेयर किया गया. 

मध्य पूर्व में हालिया संघर्ष के दौरान भारत लंबे समय से ईरान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए हुए है और साथ ही अमेरिका के साथ भी अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है (आर्काइव्ड लिंक). 

भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से जुड़े समुद्री मार्गों के ज़रिये आयात करता है और क्षेत्र में स्थिरता तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा की लगातार वकालत करता रहा है.  

हालांकि, अमेरिकी-इज़रायली हमलों की भारत सरकार द्वारा खुलकर निंदा न करने को लेकर देश के भीतर आलोचना भी हुई (आर्काइव्ड लिंक). कांग्रेस पार्टी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़रायल यात्रा की आलोचना की थी, जो मध्य पूर्व युद्ध शुरू होने से दो दिन पहले हुई थी (आर्काइव्ड लिंक). 

लेकिन वायरल वीडियो ईरानियों द्वारा भारतीय तिरंगा जलाने का नहीं है. 

वायरल वीडियो के कीफ़्रेम को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर 26 जून को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया अधिक स्पष्ट वीडियो मिला (आर्काइव्ड लिंक). 

उसके कैप्शन और वीडियो पर लिखे टेक्स्ट में बताया गया है कि यह वीडियो पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में हुए एक प्रदर्शन का है.

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो (बाएं) और इंस्टाग्राम पर मौजूद वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

वीडियो के लम्बे वर्ज़न में इमामिया स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन का बैनर भी दिखता है (आर्काइव्ड लिंक). 

इसके बाद कीवर्ड सर्च करने पर इसी ऑर्गनाइज़ेशन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की गयी एक क्लिप मिली जिसमें वायरल वीडियो के समान दृश्य दिखाई देते हैं -- जिनमें झंडों को जलाया जाना भी शामिल है (आर्काइव्ड लिंक). 

पोस्ट का उर्दू कैप्शन है, "9 मुहर्रम के मुख्य जुलूस के दौरान की कुछ झलकियां." 

छात्र संगठन के एक प्रवक्ता ने AFP को बताया कि यह वीडियो 25 जून, 2026 को कराची की एम ए जिन्ना रोड पर 9 मुहर्रम के जुलूस के दौरान रिकॉर्ड किया गया था और इसमें स्थानीय लोगों की वास्तविक भावनाएं दिखाई गई हैं. 

उन्होंने 8 जुलाई को AFP से कहा, "हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि इस कार्यक्रम में किसी भी ईरानी या किसी अन्य विदेशी नागरिक ने हिस्सा नहीं लिया ऐसे सभी दावे पूरी तरह झूठे, मनगढ़ंत और निराधार हैं. 

वीडियो की पृष्ठभूमि कराची की एम ए जिन्ना रोड की गूगल स्ट्रीट व्यू तस्वीरों से मेल खाती है (आर्काइव्ड लिंक). 

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो (बाएं) और कराची की गूगल स्ट्रीट व्यू इमेजरी में दिख रही इमारत के स्क्रीनशॉट की तुलना, AFP द्वारा हाइलाइटेड समान तत्व

स्थानीय मीडिया ने भी कराची में निकले इस जुलूस और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग की थी. AFP ने भी इस प्रदर्शन की तस्वीरें प्रकाशित की थीं (आर्काइव्ड लिंक).

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25 जून 2026 को कराची में मुहर्रम के पवित्र इस्लामी महीने के नौवें दिन निकाले गए जुलूस के दौरान शिया मुसलमानों ने अमेरिका, इज़रायल और भारत के राष्ट्रीय झंडे जलाए (AFP / Asif HASSAN)

AFP पहले भी पाकिस्तान में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े अन्य भ्रामक दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है.

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