करंट लगने से मृत युवक का वीडियो बांग्लादेश में 2025 में हुई दीपू चंद्र दास लिंचिंग से जोड़कर वायरल
- प्रकाशित 13 जुलाई 2026, 11h48
- 3 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, Eyamin SAJID, एफप भारत, एफप बांग्लादेश
पिछले साल बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोप में एक गारमेंट फ़ैक्ट्री में काम करने वाले हिंदू कर्मचारी दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो इस गलत दावे से शेयर किया जा रहा है कि उसमें दिख रहा व्यक्ति दास की हत्या का आरोपी था और उसकी बिजली के तार पर गिरने से मौत हो गई. स्थानीय पुलिस और मृतक के परिवार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का 2025 की उस हत्या से कोई संबंध नहीं था.
वीडियो को 25 जून, 2026 को फ़ेसबुक पर शेयर करते हुए कैप्शन दिया गया, "दीपू दास हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त हसन सहादत का अंत! बिजली के तार पर लटका पाया गया. बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा करने वालों पर अब अज्ञात बंदूकधारियों का साया! न्याय का चक्र घूम रहा है."
लगभग 21 सेकंड के वीडियो में एक व्यक्ति छत पर पड़ा दिखाई देता है. उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा हाईटेंशन तारों पर टिका हुआ है, जबकि आसपास बचावकर्मी और अन्य लोग मौजूद हैं.
चेतावनी
अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कई हमले हुए. इन हमलों को हिंदुओं के शेख हसीना सरकार के प्रति कथित समर्थन से जोड़कर देखा गया. भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कम से कम 11 हिंदुओं की हत्या हुई थी (आर्काइव्ड लिंक यहां, यहां).
इन्हीं घटनाओं में दीपू चंद्र दास भी शामिल थे जिनकी ढाका के उत्तर में स्थित मायमनसिंह में 18 दिसंबर 2025 को ईशनिंदा के आरोपों के बाद पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी (आर्काइव्ड लिंक).
जनवरी 2026 में जारी पुलिस आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े 645 मामलों में से केवल 12 प्रतिशत को सांप्रदायिक वजहों से जुड़ा माना गया था.
इंस्टाग्राम और X पर कुछ यूज़र्स ने इस मौत को दास के हत्या का "बदला" बताया, जिससे प्रतीत होता है कि वे इसे सच मान रहे हैं.
हालांकि, स्थानीय पुलिस और वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के एक रिश्तेदार ने AFP को बताया कि उसका दीपू दास की हत्या से किसी भी तरह का संबंध नहीं था.
दुर्घटना में मौत
वीडियो के कीफ़्रेम को कुछ कीवर्ड्स के साथ गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही वीडियो बांग्लादेशी न्यूज़ आउटलेट दैनिक सोकाल के फ़ेसबुक पेज पर 18 जून को शेयर किया गया मिला, जिसके साथ बांग्ला कैप्शन है, "पाबना में करंट लगने से युवक की मौत" (आर्काइव्ड लिंक).
चेतावनी
पाबना, बांग्लादेश का एक शहर है जो मायमनसिंह -- जहां दीपू दास की हत्या हुई थी -- से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित है.
आगे कीवर्ड सर्च में बांग्लादेशी मीडिया संस्थानों बीडीन्यूज़24 और ओइशी बांग्ला की रिपोर्ट्स मिली. इनमें मृतक की पहचान 30 वर्षीय शहादत हुसैन के रूप में की गई, जो पाबना की एक स्थानीय दुकान में काम करता था. रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि 18 जून को छत पर जमा बारिश का पानी निकालते समय उसका पैर फिसल गया और वह बिजली के तार पर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई (आर्काइव्ड लिंक यहां, यहां).
पाबना थाने के प्रभारी नाज़मुल हुसैन ने 29 जून को AFP को बताया कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति और दीपू दास के बीच कोई संबंध नहीं था.
उन्होंने कहा, "यह एक दुर्घटना थी, मृतक दुकान की छत पर जमा पानी हटाने गया था वहां उसका पैर फिसल गया और करंट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई."
AFP ने दुकान के मालिक और शहादत हुसैन के चाचा मोहम्मद अकुल हुसैन से भी बात की. उन्होंने वायरल दावे को "पूरी तरह गलत" बताया.
उन्होंने 30 जून को AFP से कहा, "मेरा भतीजा विदेश में काम कर चुका था. उसका गारमेंट फ़ैक्ट्री कर्मचारी दीपू दास की लिंचिंग से कोई संबंध नहीं था."
स्थानीय मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश पुलिस ने दीपू दास हत्या मामले के मुख्य आरोपी, पूर्व शिक्षक यासिन अराफ़ात को गिरफ़्तार कर लिया था (आर्काइव्ड लिंक).
मामले के जांच अधिकारी मोहम्मद तोअबुल इस्लाम ने 5 जुलाई को AFP को बताया कि दीपू दास हत्या मामले में गिरफ़्तार किसी भी व्यक्ति का नाम शहादत हुसैन नहीं है.
बांग्लादेश में अशांति से जुड़े कई भ्रामक दावों का AFP पहले भी फ़ैक्ट-चेक कर चुका है.
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