कनाडा और पेरिस में फ़िल्माये वीडियो ईरान में हुए विरोध प्रदर्शन के दावे से वायरल
- प्रकाशित 19 जनवरी 2026, 07h49
- 4 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, Sachin BAGHEL, एफप भारत
महंगाई और इस्लामिक राज्यसत्ता के खिलाफ़ हुए प्रदर्शनों पर कार्रवाई के विरोध में ईरान में लोग सड़कों पर उतर आये हैं, इसी बीच इन प्रदर्शनों से जोड़कर सोशल मीडिया पर ऐसे दो वीडियो काफ़ी शेयर हुए जिनमें दावा किया गया कि वे ईरान में महिलाओं को प्रदर्शनरत दिखाते हैं. जबकि असल में ये वीडियो फ़्रांस और कनाडा में ईरान में चल रहे आंदोलन के समर्थन में लोगों द्वारा किए गए प्रदर्शनों के हैं.
जनवरी 12, 2026 को फ़ेसबुक पर शेयर किए गए वीडियो के कैप्शन का एक हिस्सा है , "ईरान में इस बहादुर लड़की ने खामनेई की इस्लामिक सत्ता के खिलाफ बुर्का उतारकर खुला मोर्चा खोल दिया है."
वीडियो में एक महिला रैली के दौरान अपने सिर से स्कार्फ़ और ट्रेंच कोट उतारती है और आसपास मौजूद लोग तालियां बजाते हैं.
10 जनवरी को X पर शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में एक महिला ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की तस्वीर जलाती हुई दिखाई देती है.
वीडियो का कैप्शन है, "ये वीडियो ईरान की है. एक लड़की सिगरेट पीते हुए खामनेई की तस्वीर चला रही है."
ये वीडियो फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और X पर भी इसी तरह के दावे के साथ शेयर किए गए हैं, जिनमें इन्हें ईरान में हुए प्रदर्शनों का बताया गया. ये प्रदर्शन देश की आर्थिक बदहाली से नाराज़गी के चलते शुरू हुए थे और प्रशासन द्वारा इन पर सख्ती से कार्रवाई के चलते ये विशाल और हिंसक हो गए (आर्काइव्ड लिंक).
देशभर में फैले ये प्रदर्शन 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान पर शासन कर रही धार्मिक राज्यसत्ता के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गए हैं. कई लोग इस्लामिक शासन को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं (आर्काइव्ड लिंक).
ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनों के लिए विदेशी दख़ल को ज़िम्मेदार ठहराते हुए इसके जवाब में अपने समर्थन में देशव्यापी रैलियां भी निकाली.
नॉर्वे स्थित संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने कम से कम 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है और 10,000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया है (आर्काइव्ड लिंक).
हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल ये वीडियो ईरान में नहीं फ़िल्माये गए हैं.
पेरिस में प्रदर्शन
महिला के सिर से स्कार्फ़ हटाने वाले वीडियो के की-फ़्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि यह क्लिप 11 जनवरी को फ्रांस में रहने वाले एक यूज़र के वेरिफ़ाइड इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट की गई थी (आर्काइव्ड लिंक).
इंस्टाग्राम पर इस वीडियो के साथ कैप्शन है: "इस्लामी अत्याचार के ख़िलाफ़ ईरान का समर्थन करें."
वीडियो पोस्ट करने वाली महिला ने एएफ़पी को बताया कि वह फ़्रांस की एक एलजीबीटीक्यू+ कार्यकर्ता हैं और पेरिस स्थित संगठन 'कलेक्टिफ़ एरोस' की प्रवक्ता हैं.
उन्होंने 13 जनवरी को एएफ़पी को बताया कि यह प्रदर्शन 11 जनवरी को पेरिस में हुआ था. उन्होंने आगे कहा, “यह सभा 'होमा एसोसिएशन' ने आयोजित की थी, जो फ़्रांस में रहने वाले ईरानियों और उनके फ़्रांसिसी समर्थकों को एकजुट कर ईरानी क्रांति के बारे में जागरूकता फैलाता है.
"होमा एसोसिएशन ने मुझे समर्थन के प्रतीक के तौर पर उनके ट्रक पर यह प्रदर्शन करने की अनुमति दी," उन्होंने एएफ़पी को बताया.
वीडियो में दिखने वाले कई दृश्य गूगल स्ट्रीट व्यू पर मौजूद प्रदर्शन स्थल की तस्वीरों से भी मेल खाते हैं (आर्काइव्ड लिंक).
कनाडा का वीडियो
महिला द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता की तस्वीर जलाते हुए दिखाए गए वीडियो के की-फ़्रेम्स पर किए गए रिवर्स इमेज सर्च से वही क्लिप 9 जनवरी को X पर किए गए एक पोस्ट में भी मिली (आर्काइव्ड लिंक).
आगे कीवर्ड सर्च में पता चला कि इस वीडियो के सिलसिले में उक्त महिला का 13 जनवरी को स्पेन की न्यूज़ वेबसाइट 'द ऑब्जेक्टिव' ने इंटरव्यू किया है (आर्काइव्ड लिंक).
'द ऑब्जर्वर' की रिपोर्ट के मुताबिक, वह महिला ईरानी है और कनाडा में निर्वासन में रह रही है.
पुर्तगाल की फ़ैक्ट-चेक वेबसाइट 'लूसा' ने इस दावे को फ़ैक्ट-चेक किया कि वीडियो ईरान के भीतर किसी प्रदर्शनकारी का है. जांच में वीडियो की लोकेशन कनाडा के टोरंटो के बाहरी इलाके रिचमंड हिल के एक कार पार्क की पाई गई (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो में दिखने वाले बैकग्राउंड के दृश्य भी गूगल स्ट्रीट व्यू पर कनाडा के रिचमंड हिल शहर की तस्वीरों से मेल खाते हैं (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बारे में अन्य गलत दावों को भी फ़ैक्ट-चेक किया है.
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