सऊदी अरब में यूएस दूतावास पर हमले के दावे से पुराना वीडियो वायरल

अमेरिका-इज़रायल द्वारा शुरू किये गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद ईरान द्वारा खाड़ी देशों में जवाबी कार्रवाई के बीच ड्रोन के हमले से सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास में छोटी आग लग गई. लेकिन सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा एक वीडियो इस बढ़ते मध्य-पूर्व संघर्ष से संबंधित नहीं है. यह वीडियो कम से कम फ़रवरी 2026 की शुरुआत से इंटरनेट पर मौजूद है और एएफ़पी ने इसे रियाद के एक हाईवे पर जियोलोकेट किया है, जो दूतावास से कई किलोमीटर दूर है. 

सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने 3 मार्च को वीडियो शेयर करते हुए लिखा, जिसका एक हिस्सा है, "हाइपरसोनिक मिसाइलों से धधकता अमेरिकी दूतावास रियाद."

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर एएफ़पी द्वारा X साइन जोड़ा गया है

पोस्ट में शेयर किए गए वीडियो में आग की लपटें और घना धुआं उठता दिखाई देता है, जिसकी वजह से फ़्रीवे पर ट्रैफ़िक रुका हुआ है. इस पोस्ट को फ़ॉक्स न्यूज़ के मुख्य राजनीतिक एंकर ब्रेट बैयर ने भी शेयर किया था. उन्होंने अपने 1.7 मिलियन फ़ॉलोअर्स वाले X अकाउंट पर लिखा (जो बाद में डिलीट कर दिया गया), "खुशकिस्मती से कोई घायल नहीं हुआ."

इसी तरह के दावे वाले पोस्ट X, फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और टिक-टॉक पर कई भाषाओं में शेयर किये गए और कुछ ऑनलाइन खबरों में भी प्रकाशित हुए. यह सब तब हुआ जब सऊदी रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि 3 मार्च को रियाद स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका के दूतावास पर दो ड्रोन टकराए, जिससे आग लग गई. बाद में दूतावास ने भी इस हमले की पुष्टि की. 

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के दौरान ईरान ने जवाबी हमले जारी रखे हैं. यह युद्ध 28 फ़रवरी को शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमले किए. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, जो 1989 से देश के धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्वकर्ता थे. 

हालांकि यह वीडियो रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास के विस्फोट से जुड़ा नहीं है. 

रिवर्स इमेज सर्च से पता चला कि यही वीडियो 6 फ़रवरी 2026, यानी युद्ध शुरू होने से पहले, से ही सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा था (आर्काइव्ड लिंक यहां, यहां और यहां).

पोस्ट पर लोगों ने कमेंट किया कि वीडियो एक फ़्यूल टैंकर में लगी आग का है और कुछ ने यह भी कहा कि क्लिप एक साल या उससे भी ज़्यादा पुराना हो सकता है.

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6 फ़रवरी 2026 को यूट्यूब पर शेयर किये गए वीडियो का स्क्रीनशॉट

एएफ़पी मूल वीडियो या आग लगने के कारण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका. 

हालांकि, रियाद में यात्रा के दौरान ड्राइवरों द्वारा यूट्यूब पर अपलोड किए गए डैशकैम वीडियो की समीक्षा करके, एएफ़पी ने आग वाले वीडियो में दिख रहे हाईवे साइन को एक अन्य वीडियो में दिखे संकेत से मिलाया, जिसमें सेकंड रिंग रोड पर ड्राइव दिखाई गई है (आर्काइव्ड लिंक). इसमें प्रतीक, साइन, रंग और लिखावट सभी समान दिखाई देते हैं. 

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4 मार्च 2026 को यूट्यूब पर मौजूद वीडियो का स्क्रीनशॉट
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4 मार्च 2026 को यूट्यूब से लिया गया स्क्रीनशॉट

इसके बाद एएफ़पी ने वाहन वाले रास्ते को गूगल अर्थ की सैटेलाइट तस्वीरों से मिलाकर आग लगने की अनुमानित जगह की पहचान की (आर्काइव्ड लिंक). जियोकोऑर्डिनेट्स से पुष्टि होती है कि आग अमेरिकी दूतावास से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व में लगी थी, जो शहर के कूटनीतिक क्षेत्र में स्थित है (आर्काइव्ड लिंक). 

3 मार्च को एएफ़पी द्वारा ली गई एक तस्वीर से पता चलता है कि दूतावास के आसपास का इलाका पेड़ों और इमारतों से घिरा हुआ है, जबकि ऑनलाइन गलत दावे के साथ शेयर किए गए वीडियो में दिखाई देने वाला हाईवे ऐसा नहीं है. 

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3 मार्च 2026 को रियाद में अमेरिकी दूतावास की मूल तस्वीर, जिस पर ड्रोन हमले किए गए थे (AFP)

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से जुड़ी अन्य गलत सूचनाओं को भी एएफ़पी ने फ़ैक्ट चेक किया है. 

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