"इज़रायली सैनिक" के गलत दावे से यूएस इन्फ़्लुएंसर का पुराना वीडियो वायरल

अमेरिका और इज़रायल द्वारा तेहरान के खिलाफ़ शुरू किये गए संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ईरान में एक इज़रायली सैनिक को पकड़ लिया गया है. हालांकि, यह दावा गलत है. यह वीडियो दरअसल जनवरी में अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में एक दक्षिणपंथी इन्फ़्लुएंसर को प्रदर्शन में व्यवधान डालने के लिए उसके साथ प्रदर्शनकारियों द्वारा किया गया दुर्व्यवहार दिखाता है.   

6 मार्च 2026 को फ़ेसबुक पर शेयर किए गए वीडियो का हिंदी कैप्शन है, "ईरान में इज़राइली सैनिक पकड़ा गया". 

वीडियो में कुछ लोग एक व्यक्ति, जिसके सिर के पीछे से खून बह रहा है, को भीड़ से दूर ले जाते दिख रहे हैं. 

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट, जिस पर एएफ़पी द्वारा X साइन जोड़ा गया है

फ़ेसबुक पर इसी वीडियो को उस वक्त शेयर किया जा रहा है जब अमेरिका और इज़रायल की सेनाओं ने 28 फ़रवरी को शुरू किए गए एक बड़े सैन्य अभियान के तहत ईरान में हज़ारों मिसाइलें दागीं (आर्काइव्ड लिंक). 

इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में इज़रायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अतिरिक्त सैन्य बल भेज रहा है, जिससे हवाई हमलों के अलावा अन्य विकल्प भी खुल सकते हैं. हालांकि, 14 मार्च तक ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि अमेरिकी या इज़रायली सैनिक ईरान के अंदर तैनात किए गए या पकड़े गए हों. 

गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के कीफ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर 21 जनवरी को फ़ेसबुक पर पोस्ट किया गया एक समान वीडियो मिला (आर्काइव्ड लिंक). 

इसके स्पेनिश कैप्शन के अनुसार वीडियो में अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में इन्फ़्लुएंसर जेक लैंग मौजूद है. 

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गलत दावे से शेयर की गई वीडियो (बाएं) और फ़ेसबुक पर मौजूद वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

आगे सम्बंधित कीवर्ड सर्च करने पर 18 जनवरी को प्रकाशित The Guardian और Reuters की रिपोर्ट्स मिलीं, जिनमें ऐसे ही समान दृश्य हैं (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां). 

The Guardian की रिपोर्ट के अनुसार, पहले से प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने लैंग के उस प्रयास को असफ़ल कर दिया, जिसमें वह मिनियापोलिस में ट्रंप प्रशासन की प्रवासियों पर की जा रही सख़्त कार्रवाई और "इस्लाम-विरोधी, सोमाली-विरोधी और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE)" के समर्थन में प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहा था (आर्काइव्ड लिंक). 

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि "लैंग जब वहां से जा रहा था, तब वह घायल दिख रहा था और उसके सिर पर चोट के निशान और खरोंचें थीं."

एएफ़पी ने भी लैंग की उस वक्त की तस्वीरें खींची. 

इसके अलावा, गलत दावे के साथ शेयर किए गए वीडियो में दिख रही इमारतें मिनियापोलिस के गूगल स्ट्रीट व्यू की तस्वीरों से मेल खाती हैं (आर्काइव्ड लिंक). 

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गलत दावे से शेयर की गई वीडियो (बाएं) और मिनियापोलिस की गूगल स्ट्रीट व्यू इमेजरी के स्क्रीनशॉट की तुलना, समानताएं एएफ़पी ने हाईलाइट की हैं

एएफ़पी ने पश्चिम एशिया युद्ध से संबंधित अन्य गलत दावों को भी फ़ैक्ट-चेक किया है.

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