ये तस्वीर भारतीय खिलाड़ियों के लिए आयोजित सम्मान समारोह की है, किसान आंदोलन की नहीं

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अगस्त में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले तीन भारतीय पहलवानों की तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया गया है कि इसमें वो 2020 में हुए किसान आंदोलन में बैठे हैं. हालांकि इनमें से एक पहलवान ने आंदोलन का समर्थन किया था, लेकिन ये तस्वीर किसान आंदोलन की नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ये तस्वीर खिलाड़ियों के लिए रखे गए एक समाहरोह की है जब वो टोक्यो ओलिंपिक से वापिस लौटे थे. मौके पर मौजूद एक किसान नेता ने AFP से इस बात की पुष्टि की.

ये तस्वीर ट्विटर पर 11 अगस्त, 2022 को यहां शेयर की गयी जिसके बाद इसे 5,300 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया है.

इसमें भारतीय पहलवान दीपक पुनिया, रवि कुमार दहिया और बजरंग पुनिया नज़र आ रहे हैं जिनपर लाल रंग से घेरा लगाया गया है.

तीनों पहलवानों ने अगस्त में बर्मिंघम में हुए कामनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था.

पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया है, “ये फोटो किसान आंदोलन की है. और ये तीनों पहलवान अब सोना जीतकर आए हैं.”

Screenshot of the misleading tweet, captured on August 23, 2022

ज्ञात हो कि दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसानों ने तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ एक साल लम्बा आंदोलन किया था जो दिसंबर 2021 में तब ख़त्म हुआ जब प्रधानमंत्री ने ये तीन कानून वापस लेने की घोषणा की.

किसानों का मानना था कि ये तीनों कानून लागू होने से कृषि क्षेत्र पर निजी कंपनियों का कब्ज़ा हो जाएगा.

यही तस्वीर कुछ इसी दावे के साथ फ़ेसबुक पर यहां, यहां और यहां शेयर की गयी.

पोस्ट के कॉमेंट्स को देख कर मालूम होता है कि यूज़र्स ने दावे को सच मान लिया है.

एक यूज़र ने कहा, “ओर किसान आंदोलन के वक़्त गोदी मीडिया इन्हें ख़ालिस्तनी आतंकवादी बता रहा था.”

एक अन्य ने लिखा, “एक अंतर अभी भी है इनमे ..आंदोलन के वक्त ये देशद्रोही थे और अब ये राष्ट्रभक्त और देश के पहलवान है...ऐसा मैं नही भाजपा कहती है.”

यहां ये बता दे कि बजरंग पुनिया ने नवंबर 2020 में किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया था.

दीपक पुनिया और रवि कुमार ने सार्वजानिक तौर पर ऐसा कोई बयान या समर्थन नहीं दिया.

हालांकि तीनों पहलवानों को साथ दिखाती ये तस्वीर किसान आंदोलन की नहीं है.

स्वागत समारोह

तस्वीर में पीछे दिख रहे बैनर पर लिखा हुआ है- “समारोह” और “खिलाड़ियों का”.

A zoomed-in view of the banner visible in the background of the photo used in the misleading posts

इस बारे में कीवर्ड सर्च करने पर हमें हरियाणा एक्सप्रेस की 21 सितम्बर, 2021 की एक रिपोर्ट मिली.

इस रिपोर्ट में इसी मौके की दूसरे एंगल से ली हुई एक तस्वीर देखी जा सकती है. हालांकि तस्वीर दूसरे कोण से ली गयी है मगर तीनों पहलवानों के कपड़े वायरल तस्वीर से मेल खाते हैं.

नीचे भ्रामक पोस्ट वाली तस्वीर (बाएं) की तुलना हरियाणा एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मिली तस्वीर (दाएं) से की गयी है.

Screenshot comparison of the image in the misleading posts (left) and one image used by the Haryana Express (right)

रिपोर्ट के मुताबिक ये स्वागत समारोह सोनीपत में आयोजित हुआ था जिसमें कोरोना के कारण देर से, यानी, जुलाई 2021 में आयोजित हुए टोक्यो ओलिंपिक्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का स्वागत किया गया था.

भारत ने टोक्यो ओलंपिक्स ने कुल 7 पदक जीते थे जिसमें रवि कुमार दहिया ने एक रजत पदक और बजरंग पुनिया ने एक कांस्य पदक हासिल किया था.

स्वागत समारोह की तस्वीरें कुछ अन्य स्थानीय मीडिया में भी यहां, यहां, और यहां प्रकाशित की गयी थी.

पंजाब केसरी हरियाणा ने भी अपने यूट्यूब चैनल पर इस समारोह का वीडियो पब्लिश किया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक ये समारोह एक किसान यूनियन ने आयोजित की थी.

"तस्वीर आंदोलन से नहीं है"

किसान आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा और इस समारोह के आयोजकों में से एक किसान नेता राकेश टिकैत ने AFP को बताया कि ये तस्वीर आंदोलन से नहीं जुड़ी है.

उन्होंने कहा, “ये तस्वीर सोनीपत में 10 सितम्बर, 2021 को आयोजित किये गए सम्मान समारोह की है. हम किसानों ने टोक्यो ओलंपिक्स से वापिस आये कुछ खिलाड़ियों को सम्म्मानित किया था.”

उन्होंने आगे कहा, “इस समारोह के दौरान कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ था.”

( Uzair RIZVI)
टोक्यो ओलंपिक्स भारतीय किसान आंदोलन